अपनी नजरों से कभी न गिराना, नेक राहों पे मुझको चलाना... दीनबंधु दया का खजाना, बेबसों पे हमेशा लुटाना.... मैं तो जैसा भी हूँ बस तुम्हारा, आके दर पे खड़ा सिर झुकाऊं... मैं रहु इस जगत में कही भी, तेरे श्री चरणों न भूल पाऊं